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केजरीवाल , गैस के दाम और एक नया झूठ

पिछले कुछ हफ़्तों से आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल जी गैस के दामों की बढ़ोतरी को ले कर काफी चिंतित हैं एवं इस मुद्दे को ले कर विरोधियो पर आक्रामक हैं  जिसमें नरेंद्र मोदी ही प्रमुखता से निशाने पर है। केजरीवाल जी ने अपने भाषणों में कहा है कि 1 अप्रैल से गैस के दामों में बढ़ोतरी होगी जिससे देश में जबर्दस्त महंगायी बढ़ेगी । उनका यह भी कहना है कि नरेंद्र मोदी यदि सत्ता में आते है तो चुनाव आयोग द्वारा गैस की कीमतों पर जो रोक लगायी है , वह हटा ली जायेगी क्युकी मोदी जी ने खुद केंद्र सरकार को  पत्र लिख गैस के दाम 16 $ करने की मांग की है । मुद्दा गम्भीर था ,सोचा तह तक जाया जाये, पर जो बाल की खाल निकल कर आयी वह एक दम चौकाने वाली  थी ।

सच यह है कि  ये पत्र नरेंद्र मोदी या गुजरात सरकार ने नही बल्कि गैस उत्पादन करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी जीएसपीसी जो गुजरात सरकार के द्वारा प्रमोटेड है लेकिन एक स्वतंत्र कम्पनी है उसने लिखा था | तो सार्वजनिक मंचो से सरासर यह कहना कि मोदी जी ने स्वयं पत्र लिखा ,एक सफ़ेद झूठ है ।

अब थोड़ी बात करते है इस पूरे मुद्दे की ।  भारत अपनी कुल जरूरत का सिर्फ 20 % गैस ही उत्पादित करता है बाकी का 80 % गैस खाड़ी देशों  और वेनेजुएला से आयात करता है । भारत में सिर्फ दो जगहों से ही प्राकृतिक गैस मिलती है ,आंध्रप्रदेश के पास समुद्र में गोदावरी बेसिन में जिसे केजी बेसिन कहते है और दूसरा उसी समुद्र तट पर उससे थोडा दूर जिसे दीनदयाल पश्चिम गैस फिल्ड का नाम दिया गया है । केजी बेसिन में गैस खोजना और उसे निकालने का काम रिलायंस करती है जबकि दीनदयाल गैस फिल्ड में गैस निकलने का काम जीएसपीसी करती है |इन दोनों जगहों से बहुत ही एक्सट्रीम कंडिशन में गैस निकलती है जैसे उच्च दबाव और उच्च तापमान इसलिए लागत काफी आती है। इसमें साफ़ साफ़ कहा गया है की चूँकि गैस निकालने की लागत काफी आ रही है इसलिए या तो इस फिल्ड को बंद कर दिया जाए या फिर गैस की कीमत बढाई जाए ताकि लागत मिल सके | पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि चूंकि गैस का उत्पादन साल के अंत तक शुरू हो जायेगा एवं e-auction द्वारा बिडर्स आमंत्रित कर लिए गए हैं ,इस सूरत में एक ‘pricing formula’ जरूरी है। मुद्दे की बात यह है कि यह पत्र वर्तमान ‘gas price’ बढ़ाने के लिए नहीं है , परन्तु गैस,जिसकी खोज जारी है और पूरी होने के कगार पर है ,उसके उत्पादन ,लागत के सन्दर्भ में है । सो केजरीवाल जी के द्वारा यह कहना कि मोदी जी या उनकी सरकार ने गैस के दाम बढ़ाने के लिए पत्र लिखा ,फिर एक झूठ ही है । वह गैस जो निकली ही नहीं उसके दाम कैसे बढ़ाये जा सकते है? हां ,दाम निर्धारित जरूर किये जा सकते है । तो हर बार की तरह केजरीवाल फिर फण्डामेंटली गलत है ।

एक और झूठ जो केजरीवाल के द्वारा प्रचारित किया जा रहा है की गैस के दाम बढने से रसोई गैस और उर्वरक के दाम बढ़ जायेंगे, ये पूरी तरह से निराधार है । क्योकि ये प्रकृतिक गैस है जिसे एलएनजी (LNG ) कहते है और रसोई में एलपीजी यूज होती है न की एलएनजी। विज्ञानं के छात्र रहे केजरीवाल एलपीजी और एलएनजी में अंतर न कर पाये ,सम्भव नहीं है । यह फिर जनता के सामने तोड़ मरोड़ के तथ्य प्रस्तुत कर अपना उल्लू सीधा करने की कला है , ठीक वैसे ही कि “हमने समर्थन नहीं माँगा ,कांग्रेस ने जबर्दस्ती दे दिया । “एलपीजी क्रूड के रिफाइनिंग के समय मिलने वाला बाईप्रोडक्ट है जबकि एलएनजी प्राकृतिक रूप से जमीन में मिलने वाली गैस होती है। भारत सरकार उर्वरक कम्पनियों को गैस आयात करने में सब्सिडी देती है और पहले तो गैस आयत करना काफी महंगा होता था लेकिन अब गुजरात के भरूच में समुद्र के पास दहेज नामक जगह पर गुजरात सरकार, मलेशिया की कम्पनी पेट्रोनेट और कतर सरकार और भारत सरकार, इन चारों का एक संयुक्त उपक्रम एलएनजी पेट्रोनेट लिमिटेड है जिसका टर्मिनल दहेज में बना है, वही से आज पुरे भारत को एलएनजी सप्लाई होती है। ओएनजीसी ने भी कहा है की केजी बेसिन और दीनदयाल वेस्ट गैस फिल्ड में गैस उत्पादन की लागत 14 डालर आती है इसलिए कीमत बढ़ाना ही पड़ेगा वरना ये नुकसान का सौदा होगा।  हां ,गैस के दामों में बढ़ोतरी को ले कर एक मुद्दा समान्तर रूप से विचाराधीन है , परन्तु उसका इस पत्र से कोई लेना देना नहीं है ।

भारत सरकार आज १ क्यूबिक घन मीटर गैस के आयात पर 30 डालर देती है तब केजरीवाल को कोई आपत्ति नही है  लेकिन जब वही गैस उतनी ही क्वांटीटी में जब भारत की कम्पनी रिलायस और गुजरात सरकार द्वारा प्रमोटेड कम्पनी जीएसपीसी 14+ डालर करने की मांग करते है तब केजरीवाल इसे नरेंद्र मोदी और अंबानी की मिलीभगत बताते है जबकि आज की तारीख में 80 % गैस आयात हो रहा है।

केजरीवाल ने झूठ बड़ी ही सफाई से बोला है , क्युकी वह जानते है कि जनता इतनी तह तक जायेगी नहीं ,और उसकी  ‘इग्नोरेंस’ का भरपूर लाभ विरोधियों पर निशाना साधने के काम आयेगा , और  रही बात मीडिया की ,तो उसे तो वैसे ही कुछ नहीं चमकता ।

About Kuldeep Singh

Kuldeep, is currently a graduate student at Technische Universität Berlin by profession and Social and Political analyst by choice. With his keen interest in Indian society and politics, he has developed impressive understanding on Indian politics and sociological changes.

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